लाज से यूँ लाल होकर,
छुप गया है फिर वो सूरज,
बादलों की ओट में,
खो रहा है क्यूँ
ना जाने अस्तित्व अपना,
अब नहीं दिख रही
परछाई उसकी,
दिख भी कैसे पाएगी,
जब रंग ही इन बादलों का
है भयावह,
रंग के संग चाल
भी है उसकी बदली,
तब तो हैं ये
काले और मतवाले बादल।
शाम थोडी हो चुकी है,
तब तो था कुछ लाल सा,
वो घमंडी सूरज,
पर लाज से
आँखें मिला सकता न था,
चूर कर डाला
अभिमान उसका,
आज इन मतवाले काले बादलों ने।
दिखला रहा था
कुछ दिनों से
शक्ति अपनी,
जल रहा था
और जलाता जाता था
वो इस धारा को,
ले रहा था वो परीक्षा
धैर्य की, सब प्राणियों के
मानों कर रहा था
हार पर वो विवश
और दिख रहे थे
सब बिल्कुल बेबस
पर आज खुशी भी
स्पष्ट देखि जा सकती है
उन्ही चेहरों पर
उन्ही आंखों में
जहाँ थी विवशता
और बेवसी
क्यूंकि आज
चेहरों पर
उन आंखों में
है एक प्रतीक्षा
की कब गिरेंगी
बारिश की रिमझिम फुहारें
कब मिलेगी उनको राहत
इस जलन से
और कब मान लेगा
हार अपनी वो घमंडी सूरज
Tuesday, March 25, 2008
Tuesday, November 27, 2007
ठंढ
शाम की किरणें
अब सिमट गयी हैं
निमंत्रण दे रही हैं
किसी काली रात को
धुंध में लिपटी हुई
मतवाली रात को
मौसम सर्द है
ठंडी बयार सी
बह रही है
मानों डस रही है
नागिन के जैसे
मजबूर कर रही है
सुध बुध खोने पर
जबकि आग जल रही है
लम्बी लम्बी लपटें
उठ रही हैं
जैसे परिचय दे रही हों
अपनी एकता का
पर हवा का झोंका
जैसे तेज़ी से आता है
और तूफान का
परिदृश्य रच जाता है
कैसे ठहर पाएगी ये आग
इस हवा के सामने
उलझ कर इस बवंडर में
दम तोड़ ही देगी
और निस्सहाय रह जाएँगे
जो बैठे हैं चारों तरफ़
इस इंतज़ार में की अब घटेगी ये ठंढ
और अब बंद हो जायेगा
मौसम का नग्न नृत्य
अब सिमट गयी हैं
निमंत्रण दे रही हैं
किसी काली रात को
धुंध में लिपटी हुई
मतवाली रात को
मौसम सर्द है
ठंडी बयार सी
बह रही है
मानों डस रही है
नागिन के जैसे
मजबूर कर रही है
सुध बुध खोने पर
जबकि आग जल रही है
लम्बी लम्बी लपटें
उठ रही हैं
जैसे परिचय दे रही हों
अपनी एकता का
पर हवा का झोंका
जैसे तेज़ी से आता है
और तूफान का
परिदृश्य रच जाता है
कैसे ठहर पाएगी ये आग
इस हवा के सामने
उलझ कर इस बवंडर में
दम तोड़ ही देगी
और निस्सहाय रह जाएँगे
जो बैठे हैं चारों तरफ़
इस इंतज़ार में की अब घटेगी ये ठंढ
और अब बंद हो जायेगा
मौसम का नग्न नृत्य
Monday, December 11, 2006
Meri Zindagi
मेरी ज़िंदगी तु किताब है
तु सवाल है तु ज़वाब है
मैं हो रहा हूँ अभी बड़ा
पर सोचता हूँ कहीं खड़ा
कि मैं राही हूँ किसी राह का
या मैं अंत हूँ किसी चाह का
या हूँ रास्ते का कोई दिया
अभी जल रहा हूँ कि बुझ गया
मेरी मंजिलें अभी दूर हैं
मेरी आँखों में अभी ख्वाब हैं
मेरी ज़िंदगी तु किताब है
तु सवाल है तु ज़वाब है
मैं चल रहा था कि रुक गया
दो कदम चला फिर मुड़ गया
और सोचने ये लग गया
जो सफर मेरा था शुरू हुआ
वो बढ़ रहा है या रुका हुआ
कहीं राह चलते मैं भटक गया
किसी मोड़ पर मैं अटक गया
ये मैं हूँ या मेरा रूप है
ये सच है या नकाब है
मेरी ज़िंदगी तु किताब है
तु सवाल है तु जवाब है
कई वर्ष यूँही गुजर गए
मेरे सपने सारे बिखर गए
मेरे अपने मुझसे बिछड़ गए
जो साथ थे वो ये कह गए
तुने ज़िंदगी में जो पाया है
वो तु नहीं तेरा साया है
धन के लिए तु जिया है
पर यश तो तुने गँवाया है
ये मैं नहीं मेरा अंत है
कोई लाख समझे ये खिताब है
मेरी ज़िंदगी तु किताब है
तु सवाल है तु जवाब है
तु सवाल है तु ज़वाब है
मैं हो रहा हूँ अभी बड़ा
पर सोचता हूँ कहीं खड़ा
कि मैं राही हूँ किसी राह का
या मैं अंत हूँ किसी चाह का
या हूँ रास्ते का कोई दिया
अभी जल रहा हूँ कि बुझ गया
मेरी मंजिलें अभी दूर हैं
मेरी आँखों में अभी ख्वाब हैं
मेरी ज़िंदगी तु किताब है
तु सवाल है तु ज़वाब है
मैं चल रहा था कि रुक गया
दो कदम चला फिर मुड़ गया
और सोचने ये लग गया
जो सफर मेरा था शुरू हुआ
वो बढ़ रहा है या रुका हुआ
कहीं राह चलते मैं भटक गया
किसी मोड़ पर मैं अटक गया
ये मैं हूँ या मेरा रूप है
ये सच है या नकाब है
मेरी ज़िंदगी तु किताब है
तु सवाल है तु जवाब है
कई वर्ष यूँही गुजर गए
मेरे सपने सारे बिखर गए
मेरे अपने मुझसे बिछड़ गए
जो साथ थे वो ये कह गए
तुने ज़िंदगी में जो पाया है
वो तु नहीं तेरा साया है
धन के लिए तु जिया है
पर यश तो तुने गँवाया है
ये मैं नहीं मेरा अंत है
कोई लाख समझे ये खिताब है
मेरी ज़िंदगी तु किताब है
तु सवाल है तु जवाब है
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